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Vyakaran in Hindi Meaning: व्याकरण किसे कहते हैं? परिभाषा, अंग

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हिंदी व्याकरण के प्रकार(Sampoorna Hindi vyakaran)

अगर आपको हिंदी व्याकरण के सभी भेद की जानकारी चाहिए तो यह पोस्ट अंत तक अवश्य पढ़ना पड़ेगा। इस पोस्ट में हमने व्याकरण के हर एक अंग को संक्षिप्त रूप से बताया है।

अगर आपको प्रत्येक अंग की संपूर्ण जानकारी चाहिए तो आप हर एक अंग के नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

व्याकरण उस शास्त्र को कहा जाता हैं, जिसमे भाषा के शुद्ध करने वाले नियम बताए गए हो। किसी भी भाषा के अंग प्रत्यंग का विश्लेषण तथा विवेचन व्याकरण ग्रामरकहलाता है। व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा किसी भाषा को शुद्ध बोला, पढ़ा और शुद्ध लिखा जाता है। किसी भी भाषा के लिखने, पढ़ने और बोलने के निश्चित नियम होते हैं। भाषा की शुद्धता व सुंदरता को बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। ये नियम भी व्याकरण के अंतर्गत आते हैं। व्याकरण भाषा के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण हिस्सव्याकरण उस शास्त्र को कहा जाता हैं, जिसमे भाषा के शुद्ध करने वाले नियम बताए गए हो। किसी भी भाषा के अंग प्रत्यंग का विश्लेषण तथा विवेचन व्याकरण (ग्रामर) कहलाता है।

व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा किसी भाषा को शुद्ध बोला, पढ़ा और शुद्ध लिखा जाता है। किसी भी भाषा के लिखने, पढ़ने और बोलने के निश्चित नियम होते हैं। भाषा की शुद्धता व सुंदरता को बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। ये नियम भी व्याकरण के अंतर्गत आते हैं। व्याकरण भाषा के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण हिस्सव्याकरण उस शास्त्र को कहा जाता हैं, जिसमे भाषा के शुद्ध करने वाले नियम बताए गए हो। किसी भी भाषा के अंग प्रत्यंग का विश्लेषण तथा विवेचन व्याकरण (ग्रामर) कहलाता है। व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा किसी भाषा को शुद्ध बोला, पढ़ा और शुद्ध लिखा जाता है। किसी भी भाषा के लिखने, पढ़ने और बोलने के निश्चित नियम होते हैं। भाषा की शुद्धता व सुंदरता को बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। ये नियम भी व्याकरण के अंतर्गत आते हैं।

व्याकरण भाषा के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण हिस्सव्याकरण उस शास्त्र को कहा जाता हैं, जिसमे भाषा के शुद्ध करने वाले नियम बताए गए हो। किसी भी भाषा के अंग प्रत्यंग का विश्लेषण तथा विवेचन व्याकरण (ग्रामर) कहलाता है। व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा किसी भाषा को शुद्ध बोला, पढ़ा और शुद्ध लिखा जाता है। किसी भी भाषा के लिखने, पढ़ने और बोलने के निश्चित नियम होते हैं। भाषा की शुद्धता व सुंदरता को बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। ये नियम भी व्याकरण के अंतर्गत आते हैं। व्याकरण भाषा के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

व्याकरण के अंग (Parts of Hindi Vyakaran)

भाषा की सबसे छोटी इकाई ध्वनि है. ध्वनि और उसकी लिपि प्रतिक दोनों के लिए हिंदी में वर्ण शब्द का प्रयोग होता है. ध्वनियाँ या वर्णों से शब्द तथा शब्दों से वाक्य बनता है.

भाषा के इन मुख्य तीन अंगो के आधार पर ही व्याकरण के तीन विभाग माने गए है-

  1.  वर्ण विचार- वर्ण विचार के अंतर्गत वर्ण, उसके भेद, आकार, उच्चारण, उनके संयोग या मेल के नियमो आदि पर विचार किया जाता है.
  2.  शब्द विचार- इस विभाग के अंतर्गत शब्द, उसके भेद, उत्पत्ति, रचना तथा रूपान्तर आदि के नियमों आदि पर विचार किया जाता है.
  3. वाक्य विचार- इसके अनतर्गत वाक्य से सम्बंधित उसके भेद, विश्लेषण, रचना, अवयव तथा शब्दों से वाक्य बनाने के नियमों की जानकारी दी जाती है.

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