HomeEssay

Essay on Online Shopping in Hindi : ऑनलाइन शॉपिंग पर निबंध & नुकसान

Like Tweet Pin it Share Share Email

What is Online Shopping in Hindi? Essay on Online Shopping in Hindi

Online shopping is a form of electronic commerce which allows consumers to directly buy goods or services from a seller over the Internet using a web browser. Consumers find a product of interest by visiting the website of the retailer directly or by searching among alternative vendors using a shopping search engine, which displays the same product’s availability and pricing at different e-retailers. As of 2016, customers can shop online using a range of different computers and devices, including desktop computers, laptops, tablet computers and smartphones.

ऑनलाइन शॉपिंग क्या है? ऑनलाइन शॉपिंग कैसे करते है

ऑनलाइन क्रय (Online shopping), इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य (electronic commerce) का एक विशेष रूप है जिसमें उपभोक्ता वस्तु या सेवाओं को विक्रेता से सीधे इंटरनेट के माध्यम से खरीद सकता है।

हालाँकि ऑनलाइन खरीदारी सरल और सुविधाजनक लगती है, पर इसे कई बार सरकारें कर लगाकर और महंगा कर देती हैं। सितम्बर 2016 से उत्तर प्रदेश सरकार ऑनलाइन खरीदारी पर 5% प्रवेश कर लगाया है। इसके पीछे राज्य सरकार को लगभग 600 करोड़ रुपये सालाना राजस्व लाभ होने का अनुमान लगाया गया है।

ऑनलाइन शॉपिंग के नुकसान Disadvantages of Online Shopping in Hindi

भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बड़े जोरो शोरो से चल रहा है। सर की टोपी से लेकर पैरो की जुराबों तक, छोटे से फ़ोन से लेकर बड़े से मकान तक सब कुछ ऑनलाइन बिक रहा है। हमारी युवा पीढ़ी तो सबकुछ ऑनलाइन ही कर रही है।

वैसे तो मैं भी इसी पीढ़ी का हिस्सा हूँ परन्तु मेरी पढ़ाई लिखाई इस ऑनलाइन क्रांति से थोड़ा पहले ही खत्म हो गयी थी, इसलिए मैं अपनी स्कूल/कॉलेज के जीवन में इस क्रांति से अछूता रह गया।अभी तो जितना हो सके मैं भी शॉपिंग ऑनलाइन ही करता हूँ फिर चाहे कच्छा खरीदना हो या जूते या फ़ोन।

अभी अभी हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी डिजिटल इंडिया के नाम से आंदोलन छेड़ा है तो आने वाले समय में ऑनलाइन काम-काज बढ़ेगा। लोग तो यहाँ तक कहते सुनते नजर आते है की अब बाज़ार बंद होने को है, दुकानो पर ताला लगने वाला है क्योंकि सब कुछ तो मोबाइल से ही खरीदा जा सकता है।

किन्तु मेरा कहना है की हम भारतीय लोग कभी इन बाज़ारो को बंद नहीं होने देंगे, चाहे कितना ही ऑनलाइन क्रांति ले आओ हमें मार्केट में जाके मोल-भाव करके सामान खरीदने से कोई नहीं रोक सकता।

मैं अपने दिल की बात बताऊ तो ऑनलाइन शॉपिंग में वो मजा नहीं है जो मजा किसी सामान को बाज़ार से खरीद के लाने में है।

किसी उत्सव की शॉपिंग हो या शॉपिंग का उत्सव, भारत की एक प्रजाति जिसे लोग मिडल क्लास कहते है सबसे आगे रहती है। हाई क्लास वाले तो भारत में शॉपिंग करते ही कहाँ है। और जब हम शॉपिंग को उत्सव की तरह मनाते है तो बाकायदा इसके लिए दिन महीना वार चौघड़िया निश्चित करके घर से निकलते है। अब अगर कोई कहे की इस उत्सव को घर बैठे मनाओ वो भी कंप्यूटर/मोबाइल के सामने बैठे बैठे तो इसमें क्या मजा है भाई ?

आईये मुद्दे की बात करते है और आपको समझाते है की बाज़ार में जाकर शॉपिंग करने के कितने फायदे है।

१. फैमिली आउटिंग:
हमारे यहाँ कईं लोगो के लिए शॉपिंग एक फैमिली आउटिंग की तरह होती है। यहाँ शॉपिंग से मेरा मतलब मासिक राशन की शॉपिंग से भी हो सकता है जो की बिग-बाजार, रिलायंस मार्ट या डी-मार्ट से जाके की जाती है। अपने २ साल के बच्चे को शॉपिंग कार्ट में बिठा दो और कार्ट का हैंडल अपने बड़े बच्चे को पकड़ा दो।
पुरे फ्लोर पे २-३ घंटे घूम के गृहस्थी का सारा सामान लेने के बाद बच्चो को कॅश काउंटर पर पड़ी चॉकलेट दिलवा दो। शॉपिंग की शॉपिंग , आउटिंग की आउटिंग।

२. मैच मेकिंग/नैन मटक्का
बाहर जाके खरीददारी करने का दूसरा फायदा यह है की जितने भी सिंगल भाई बंधू या देवियाँ है उनको एक मौका मिल जाता है चेक आउट करने का। कहते है की नज़रे मिली और इश्क़ हो गया , किन्तु नज़रे मिलने के लिए आपको घर से बाहर निकलना होगा और उसके लिए कोई अच्छा सा काम का बहाना चाहिए।आपने फिल्मो में देखा ही होगा कितने लोगो की कहानी दुकानो पर या बाज़ार की गलियों में नैन मटक्को से ही शुरू होती है।
मैं तो कहता हूँ की कुछ फिल्मे ऐसी बननी चाहिए जिनके नाम हो, “दो दिल मिले दूकान में “, “बिल देते देते दे दिया दिल”, etc etc …

३. “We” time for couples:
जी हाँ आज कल के कपल्स के लिए “वी टाइम” याने के दोनों को अकेले में साथ बिताने (बतियाने)का समय निकालने बहुत ही मुश्किल है। पूरा दिन तो काम काज में निकल जाता है, शाम को खा पी के टीवी देख के सो जाने में और अगले दिन से फिर वही। वीकेंड में फ्री टाइम मिलता है तो दोनों अपना अपना कोई पर्सनल काम निपटा लेते है और बाकी बचा टाइम मोबाइल या लैपटॉप की भेंट चढ़ जाता है। ऐसे में अगर शॉपिंग भी लैपटॉप/मोबाइल से ही कर लोगे तो आपस में जान पहचान कब करोगे ?
इसके लिए जाईये कम से कम राशन तो बाहर से खरीद के लाईये, आपस में बातें करने का मौका मिलेगा, किसे क्या पसंद है जानने का मौका मिलेगा और इसी बहाने सो कॉल्ड टीम वर्क भी हो जायेगा।

तो समझे आप , भारत में दुकाने और बाज़ार इतनी आसानी से बंद नहीं होने वाले।

loading...

Comments (0)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

5 × 1 =