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Diwali Essay in Hindi 2018 : दिवाली पर निबंध (मेरा पसंदीदा त्योहार)

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मेरा प्रिय त्यौहार

दीपावली पर निबंध हिंदी में Essay on Green Diwali Clean Diwali in Hindi

दीवाली या दीपावली अर्थात “रोशनी का त्योहार” शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। दीवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।

Diwali or Deepavali is the Hindu festival of lights celebrated every year in autumn in the northern hemisphere (spring in southern hemisphere).It is an official holiday in Fiji, Guyana, India, Malaysia, Mauritius, Myanmar, Nepal, Singapore, Sri Lanka, Suriname, Trinidad and Tobago, and recently Sindh Province in Pakistan. One of the most popular festivals of Hinduism, it spiritually signifies the victory of light over darkness, good over evil, knowledge over ignorance, and hope over despair.

Diwali Kyo Manate Hai? दीपावली का महत्व

दीपावली का धार्मिक महत्व हिंदू दर्शन, क्षेत्रीय मिथकों, किंवदंतियों, और मान्यताओं पर निर्भर करता है। प्राचीन हिंदू ग्रन्थ रामायण में बताया गया है कि, कई लोग दीपावली को 14 साल के वनवास पश्चात भगवान राम व पत्नी सीता और उनके भाई लक्ष्मण की वापसी के सम्मान के रूप में मानते हैं। अन्य प्राचीन हिन्दू महाकाव्य महाभारत अनुसार कुछ दीपावली को 12 वर्षों के वनवास व 1 वर्ष के अज्ञातवास के बाद पांडवों की वापसी के प्रतीक रूप में मानते हैं। कई हिंदु दीपावली को भगवान विष्णु की पत्नी तथा उत्सव, धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी से जुड़ा हुआ मानते हैं। दीपावली का पांच दिवसीय महोत्सव देवताओं और राक्षसों द्वारा दूध के लौकिक सागर के मंथन से पैदा हुई लक्ष्मी के जन्म दिवस से शुरू होता है। दीपावली की रात वह दिन है जब लक्ष्मी ने अपने पति के रूप में विष्णु को चुना और फिर उनसे शादी की। लक्ष्मी के साथ-साथ भक्त बाधाओं को दूर करने के प्रतीक गणेश; संगीत, साहित्य की प्रतीक सरस्वती; और धन प्रबंधक कुबेर को प्रसाद अर्पित करते हैं कुछ दीपावली को विष्णु की वैकुण्ठ में वापसी के दिन के रूप में मनाते है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं और जो लोग उस दिन उनकी पूजा करते है वे आगे के वर्ष के दौरान मानसिक, शारीरिक दुखों से दूर सुखी रहते हैं।

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Importance of Diwali in Hindi(Why is Diwali Celebrated?)

The religious significance of Deepavali varies regionally within India, depending on the school of Hindu philosophy, regional, legends, and beliefs. Hindus across the world celebrate Diwali in honor of the return of Lord Rama, wife Sita, brother Lakshmana and lord Hanuman to Ayodhya from exile of 14 years after Rama defeated Ravana. To honor and celebrate Lord Rama, Sita, Lakshmana and Hanuman returning from Sri Lanka and to illuminate their path, villagers light Diyas to celebrate the triumph of good over evil. For some, Diwali also celebrates the return of Pandavas after 12 years of Vanvas and one year of “Agyatavas” in Mahabharata. Furthermore, Deepavali is linked to the celebration of Lakshmi, who is venerated amongst Hindus as the goddess of wealth and prosperity and is the wife of Lord Vishnu. The 5-day festival of Diwali begins on the day Goddess Lakshmi was born from the churning of cosmic ocean of milk by the Devas (gods) and the Asuras (demons); while the night of Diwali is the day Lakshmi chose Vishnu as her husband and they were married. Along with Lakshmi, devotees make offerings to Ganesha, who symbolizes ethical beginnings and fearless remover of obstacles; Saraswati, who embodies music, literature and learning and Kubera, who symbolizes book-keeping, treasury and wealth management. Other Hindus believe that Diwali is the day Vishnu came back to Lakshmi and their abode in the Vaikuntha; so those who worship Lakshmi receive the benefit of her good mood, and therefore are blessed with mental, physical and material wellbeing during the year ahead.

दीवाली का इतिहास

भारत में प्राचीन काल से दीवाली को हिंदू कैलेंडर के कार्तिक माह में गर्मी की फसल के बाद के एक त्योहार के रूप में दर्शाया गया। दीवाली का पद्म पुराण और स्कन्द पुराण नामक संस्कृत ग्रंथों में उल्लेख मिलता है जो माना जाता है कि पहली सहस्त्राब्दी के दूसरे भाग में किन्हीं केंद्रीय पाठ को विस्तृत कर लिखे गए थे। दीये (दीपक) को स्कन्द पुराण में सूर्य के हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना गया है, सूर्य जो जीवन के लिए प्रकाश और ऊर्जा का लौकिक दाता है और जो हिन्दू कैलंडर अनुसार कार्तिक माह में अपनी स्तिथि बदलता है। कुछ क्षेत्रों में हिन्दू दीवाली को यम और नचिकेता की कथा के साथ भी जोड़ते हैं। नचिकेता की कथा जो सही बनाम गलत, ज्ञान बनाम अज्ञान, सच्चा धन बनाम क्षणिक धन आदि के बारे में बताती है; पहली सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व उपनिषद में दर्ज़ की गयी है।

7 वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में राजा हर्ष ने इसे दीपप्रतिपादुत्सव: कहा है जिसमें दिये जलाये जाते थे और नव दुल्हन और दूल्हे को तोहफे दिए जाते थे। 9 वीं शताब्दी में राजशेखर ने काव्यमीमांसा में इसे दीपमालिका कहा है जिसमें घरों की पुताई की जाती थी और तेल के दीयों से रात में घरों, सड़कों और बाजारों सजाया जाता था। फारसी यात्री और इतिहासकार अल बेरुनी, ने भारत पर अपने 11 वीं सदी के संस्मरण में, दीवाली को कार्तिक महीने में नये चंद्रमा के दिन पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार कहा है।

History of Diwali

Diwali dates back to ancient times in India, as a festival after the summer harvest in the Hindu calendar month of Kartika. The festival is mentioned in Sanskrit texts such as the Padma Purana, the Skanda Purana both completed in second half of 1st millennium AD but believed to have been expanded from a core text from an earlier era. The diyas (lamps) are mentioned in Skanda Purana to symbolically represent parts of the sun, the cosmic giver of light and energy to all life, who seasonally transitions in the Hindu calendar month of Kartik.

Hindus in some regions of India associate Diwali with the legend of Yama and Nachiketa on Kartika amavasya (Diwali night). The Nachiketa story about right versus wrong, true wealth versus transient wealth, knowledge versus ignorance is recorded in Katha Upanishad composed in 1st millennium BC.

King Harsha in the 7th century Sanskrit play Nagananda mentions Deepavali as Deepapratipadutsava (Deepa = light, pratipada = first day, utsava = festival), where lamps were lit and newly engaged brides and grooms were given gifts. Rajasekhara referred to Deepavali as Dipamalika in his 9th century Kavyamimamsa, wherein he mentions the tradition of homes being whitewashed and oil lamps decorating homes, streets and markets in the night. The Persian traveller and historian Al Biruni, in his 11th century memoir on India, wrote of Deepavali being celebrated by Hindus on New Moon day of the month of Kartika.

दीपावली से लाभ/हानि (Diwali Advantages and Disadvantages)

दीपावली से लाभ – दीपावली का पर्व मात्र एक त्यौहार नहीं है अपितु इस पर्व के कई लाभ भी हैं| जैसा की इस दिन घर एवं आसपास की जगहों की सफाई की जाती है, जिससे हमारा वातावरण शुद्ध होता है| लोग एक दूसरे के घर जाकर उनको बधाई संदेश देते हैं जिससे आपसी सद्भावना का विकास होता है और लोगों में मेलजोल बढ़ता है| दीपावली का पर्व हमें असत्य पर हुई सत्य की विजय का ज्ञान कर आती है और हमें हमेशा अज्ञानता, बुराइयों एवं असत्य से लड़ने के लिए प्रेरित करता है|

दीपावली से हानि – जैसा की हमने देखा कि दीपावली से मनुष्य को कई प्रकार के लाभ हैं, परंतु इन लाभों के अतिरिक्त दीपावली से कुछ हानियां भी है| दीपावली के दिन लोग शराब पीकरअशिष्ट आचरण करने लगते हैं एवं इस दिन लोग जुआ खेलते हैं और अपना पैसा बर्बाद करते हैं| दीपावली के दिन बहुत सारा पटाखा छुड़ाया जाता है जोकि वातावरण को प्रदूषित भी करता है और इस तरह से लोग दीपावली के लाभ को हानि में रुपांतरित कर देते हैं

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